Chief Justice of India is now covered by the RTI Act. Political parties must come next

There was never any doubt that the Supreme Court of India is a “public authority” under the Right to Information Act. This story began on November 10, 2007, when the veteran RTI activist Subhash Chandra Agarwal filed an RTI application “seeking information on declaration of assets made by the judges to the Chief Justices in […]

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Should the Indian taxpayer pay the hidden cost of donations to political parties?

  Sruthisagar Yamunan deserves to be complimented for his informative article that brings out a hidden dimension of the electoral bonds used to make anonymous donations to political parties in India. Headlined “controversial electoral bonds are not only opaque, they come at a cost to the Indian taxpayer, the article asserts that there’s an invisible […]

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सूचना कानून पर मंडराता खतरा: आम लोगों को सशक्त बनाने वाला कानून को कमजोर करने की कोशिश

  [ जगदीप एस छोकर ]: सूचना अधिकार कानून यानी आरटीआइ में संशोधन का एक और प्रयास शुरू हो गया है। यह प्रयास पहले किए गए प्रयासों से कुछ हटकर है। अब तक किए गए प्रयासों में संशोधन प्रस्ताव का मसौदा बनाकर विभिन्न वर्गों और जनता के बीच चर्चा के लिए रखा जाता था। वर्तमान संशोधन प्रस्ताव […]

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राजनीतिक दलों का रवैया

Text: जब से उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय पीठ ने संविधान के 99वें संशोधन को असंवैधानिक घोषित करते हुए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को खारिज किया और कोलेजियम व्यवस्था का पक्ष लिया तब से यह विषय लगातार चर्चा में है। अधिकतर टिप्पणीकारों ने इसे या तो सरकार और न्यायपालिका के बीच का संघर्ष कहा है […]

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